Success Story: सिलाई सीखने जाती मां के साथ लाइब्रेरी में पढ़ने लगी 3 बेटियां, आज बड़ी बेटी प्रोफेसर तो छोटी बनी लेफ्टिनेंट

गुरुग्राम, Success Story | कहते हैं परिस्थितियों का बहाना न बनाते हुए जो लोग सच्ची लगन और निष्ठा से मेहनत करते हैं, उन्हें सफलता मिलने में ज्यादा समय नहीं लगता है. कुछ ऐसी ही कहानी गुरुग्राम से सामने आई है, जहां मानेसर के गांव जमालपुर की राजेश देवी को विश्वास नहीं हो रहा हैं कि किताबों ने उनकी जिंदगी ही बदल दी है.

Gurugram Mahila

वैसे तो 3 बेटियों की मां राजेश देवी को किताबों से कोई सरोकार नहीं था. वह तो 2017 से गांव के रीड सेंटर पर सिलाई सीखने जाती थी, मगर उनके साथ जाती तीनों बेटियों को सेंटर पर स्थित लाइब्रेरी में किताबें पढ़ने की लत लग गई थी.

बेटियों ने हासिल किया मुकाम

राजेश देवी ने बताया कि उनकी बेटियां सेंटर पर दिन- दिनभर किताबें पढ़ती थी, जिसकी बदौलत उनकी बड़ी बेटी ने नेट क्वालीफाई करके पीएचडी की और आज जवाहर लाल यूनिवर्सिटी दिल्ली में प्रोफेसर है. उनकी दूसरी बेटी मैथ्स से एमएससी कर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही है. उनकी छोटी बेटी आर्मी में लेफ्टिनेंट के पद पर है. यह सब लाइब्रेरी की बदौलत ही हुआ है. लगातार 3 बेटियों के जन्म के बाद जिस समाज ने उनकी उपेक्षा की थी. वहीं, समाज आज उनको सम्मानित कर रहा है.

‘पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया’ के नारे को रीड इंडिया ने साकार कर दिखाया है. गुरुग्राम से संचालित रीड इंडिया पूरे देश में पुस्तक ज्ञान वृद्धि और स्वरोजगार प्रशिक्षण की दिशा में काम कर रही है. संस्थान ने बीते 20 वर्षों में 16 राज्यों में 65 लाइब्रेरी एंड रिसोर्स सेंटर की स्थापना की है. जिसका लाभ 300 से अधिक गांवों के जरूरतमंद युवा उठा रहे हैं. देश भर में 6 लाख से अधिक युवा उनके सेंटरों का लाभ उठा चुके हैं. पुस्तकालयों का काम स्थानीय युवा संभालते हैं.

संस्था के सदस्य एक मुहिम की तरह काम कर रहे है. इसके पीछे प्रभावी भूमिका डॉ गीता मल्होत्रा की है. वर्ष 2008 से रीड इंडिया के साथ काम कर रही गीता ने समाज सेवा कार्य की शुरुआत जेआरडी टाटा की पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया से की थी.

AI के दौर में किताबें ही सहारा

गीता मल्होत्रा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में किताबी ज्ञान की प्रसांगिकता और भी बढ़ गई है. दरअसल, AI फुलप्रूफ नहीं है. इसमें भटकाव और गुमराह होने की सम्भावना अधिक है. इससे बचाव के लिए युवाओं का का एकमात्र सहारा किताबें ही हैं. यही कारण है कि देश भर में चल रही उनकी पुस्तकालयों में युवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है. इन पुस्तकालयों में किताबें पढ़कर युवा सिविल सर्विसेज तक की तैयारी कर रहे हैं. आज ग्रामीण युवाओं के ज्ञान में वृद्धि हुई है, जो नए रोजगार के अवसर पैदा करने में मददगार साबित हो रहा है.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.