चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) ने किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने. उन्हें बाजार की अनिश्चिताओं से बचाने की दिशा में एक और हितकारी फैसला लिया है. प्रदेश सरकार ने अब मधुमक्खी पालन (शहद उत्पादन) को भी भावांतर भरपाई योजना में शामिल कर लिया है. इस फैसले के बाद ऐसे किसानों की उनकी उपज (शहद) का उचित बाजार मूल्य न मिलने की स्थिति में नुकसान की भरपाई की जा सकेगी.

क्या है भावांतर भरपाई योजना?
यदि बाजार में किसी उपज का मूल्य सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षित मूल्य से कम हो जाता है, तो सरकार आरक्षित मूल्य और बिक्री मूल्य के अंतर की राशि का भुगतान भावांतर भरपाई योजना के तहत सीधे किसानों के बैंक खातों में करती है. अब इसमें शहद उत्पादन को भी शामिल किया गया है.
इन्हीं किसानों को मिलेगा लाभ
- मधुमक्खी पालक का मधु क्रांति पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य किया गया है.
- लाभार्थी का रजिस्ट्रेशन जिला अधिकारियों द्वारा सत्यापित होना चाहिए.
- मधुमक्खी पालक के पास वैध फैमिली आईडी होनी चाहिए.
- शहद की बिक्री हनी ट्रेड सेंटर (HTC) प्लेटफॉर्म पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर की गई हो.
- बिक्री का प्रमाण HTC सिस्टम द्वारा उत्पन्न चालान के रूप में होना चाहिए.
- रजिस्ट्रेशन और सत्यापन की अवधि.
- इस योजना के तहत, 1 दिसंबर से 31 मई तक रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.
- मधुमक्खी बॉक्स का सत्यापन विभाग द्वारा जनवरी से जून के बीच केवल एक बार किया जाता है.
अधिकतम लाभ
- एक मधुमक्खी पालक अधिकतम 1,000 बॉक्स (प्रति बॉक्स 30 किलोग्राम) यानि 30 हजार किलोग्राम शहद प्रति वर्ष तक का लाभ उठा सकता है.
- लाभ लेने के लिए मधुपालकों को अपने बॉक्स पर पहचान हेतु फैमिली आईडी के अंतिम 4 अंक और क्रम संख्या खुदवाना अनिवार्य है.
- शहद की बिक्री अवधि 1 जनवरी से 30 जून तक निर्धारित है.
शहद की बिक्री प्रकिया और भुगतान
- मधुमक्खी पालकों को लाभ के लिए न्यूनतम 500 किलोग्राम शहद HTC प्लेटफॉर्म पर लाना अनिवार्य है.
- शहद का वजन और नमूना संग्रहण पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा.
- शहद की गुणवत्ता परीक्षण एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कराना अनिवार्य है.
- शहद की नीलामी 90 रुपये प्रति किलोग्राम के आरक्षित मूल्य के आधार पर होगी.
- यदि शहद की बिक्री 90 रुपये प्रति किलोग्राम से कम भाव पर होती है, तो भावांतर का प्रोत्साहन 90 रुपये प्रति किलोग्राम के आधार पर दिया जायेगा.
- बिक्री के लिए शहद को फूड ग्रेड बकेट में लाना होगा.
- नीलामी के बाद भुगतान सीधे एस्क्रो अकाउंट के जरिए किया जाएगा.