कैथल | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर ऑर्गेनिक और बागवानी खेती को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि कम लागत पर अधिक मुनाफा कमाया जा सकें. इसके साथ ही, अतिरिक्त व्यवसाय करने के उद्देश्य से खेती के अलावा पशुपालन पर जोर दिया जा रहा है. आज प्रदेश के कई किसानों के पास उच्च नस्ल की भैंसें और गाय है, जिनकी कीमत के सामने लग्जरी गाड़ियां भी फेल हैं. किसानों के पशुओं की कीमत लाखों रूपए तक पहुंच जाती है, लेकिन फिर भी किसान अपने पशुओं को बेचने से मना कर देते हैं.
मालिक को किया मालामाल
कैथल जिले के गांव डांगरा के रहने वाले मनीष पूनिया को 11 महीने की बछड़ी ने मालामाल कर दिया है. दिवाली के शुभ अवसर पर उनके घर लक्ष्मी की बरसात हुई है. उनकी थारपारकर नस्ल गाय की बछड़ी 1.81 लाख रुपए में बिकी है. जो एक नया रिकॉर्ड कायम हो गया है. इस बछड़ी को खरकड़ा गांव के रहने वाले गोलू ने खरीदा है.
बाल्टी भरकर दूध देती थारपारकर
मनीष पूनिया ने बताया कि वह गाय बेचने का व्यापार नहीं करता है, लेकिन पशुबाड़े में जगह कम होने के चलते उसे बछड़ी बेचने पर मजबूर होना पड़ा. थारपारकर नस्ल गाय की सफेद रंग की यह बछड़ी कद- काठी में लंबी- तगड़ी और देखने में एकदम खूबसूरत हैं, तभी उसकी इतनी ऊंची कीमत लगी है. उसने बताया कि थारपारकर नस्ल गाय प्रतिदिन 18 से 20 किलोग्राम तक दूध देती है. गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी होता है. गाय के दूध में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है.
मनीष ने कहा कि किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए खेती- बाड़ी के साथ- साथ पशुपालन का व्यवसाय भी करना चाहिए. इससे किसानों को आर्थिक स्तर पर राहत मिलती है. आज हमारे हरियाणा के अनेकों किसान पशुपालन व्यवसाय में उन्नत नस्ल की भैंसें और गाय पालकर देशभर में नाम कमा रहे हैं.
