चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने RTI नियमों में संशोधन करते हुए कुछ बदलाव किए है. सरकार ने सभी विभागों को यह निर्देश दिए है कि राज्य जन सूचना अधिकारियों (SPIO) एवं प्राधिकारियों द्वारा RTI से संबंधित सवालों के पूरे जवाब, अपीलें और इससे संबंधित वास्तविक दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएं. यदि फाइल का आकार बड़ा है तो फाइलों को छोटा करके आकार के अनुरूप अपलोड किया जाए.
सही जानकारी न देने पर सरकार सख्त
सरकार को जानकारी मिली है कि कई मामलों में RTI से संबंधित अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन पोर्टल पर जवाब सिर्फ उत्तर मिला है या उत्तर दे दिया गया है जैसे कम शब्दों में दिया जाता है. उनके द्वारा संबंधित वास्तविक डॉक्यूमेंट अपलोड नहीं किए जाते है. इससे आमतौर पर द्वितीय अपील पर सूचना नहीं पहुंच पाती है क्योंकि RTI ऑनलाइन पोर्टल को NIC द्वारा केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में मिला दिया गया है.
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, सभी विभाग के अध्यक्षों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों के मुख्य सचिवों एवं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जनरल रजिस्ट्रार को एक पत्र जारी किया है.
क्या होता है RTI?
RTI एक्ट 2005 भारत का एक ऐसा कानून है जो जनता को सरकारी विभागों और सार्वजनिक प्राधिकरणों से कोई भी सूचना मांगने का अधिकार देता है, जिससे कार्यों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है और भ्रष्टाचार की मात्रा में कमी आती है. इसके अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी भी सरकारी तथ्यों पर आधारित सूचना के लिए आवेदन कर सकता है और विभाग को 30 दिनों के अंदर ही जानकारी देनी होती है.
