करनाल | हरियाणा के करनाल जिले में एक किसान गेंदा फूल की खेती से सफलता की नई कहानी लिख रहा है. उसने अपने एक दोस्त की सलाह पर फूलों की खेती में किस्मत आजमाना शुरू किया था लेकिन आज यह खेती उसके लिए वरदान साबित हो रही है. वह कम लागत में अधिक मुनाफा कमाकर न केवल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है बल्कि खुद की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रहा है.

किसान जगतार सिंह ने बताया कि उनका एक साथी 20 एकड़ जमीन पर फूलों की खेती से अच्छा- खासा पैसा कमा रहा था. उन्हीं की सलाह पर उसने भी गेहूं- धान जैसी परम्परागत खेती का मोह त्याग कर फूलों की खेती करना शुरू कर दिया. आज वह अपनी 2 एकड़ जमीन पर गेंदें के फूलों की खेती सहित कई अन्य किस्मों की मौसमी सब्जियां उगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहा है. इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बरकरार रहती है.
करनाल के जगतार की बदली तकदीर
उन्होंने बताया कि सितंबर महीने में लड्डू किस्म के पौध को लगाया जा सकता है और गर्मी के मौसम में जाफरी किस्म की खेती काफी लाभकारी साबित हो रही है. इसके साथ ही साइड में खाली पड़ी जमीन पर धनिया, पालक, मक्का और सरसों की खेती कर रहे हैं. साल में दो बार (दो फसल) गेंदे के फूल की खेती की जाती है. करीब एक महीने बाद फूलों की तुड़ाई शुरू होने के साथ ही कमाई शुरू हो जाती है. एक एकड़ जमीन पर फूलों की खेती में 15 हजार रुपए के आसपास खर्च आता है जबकि 60 हजार रुपए के फूल बिक जाते हैं. इस खेती में सिंचाई के लिए नाममात्र पानी की जरूरत पड़ती है.
जगतार सिंह ने बताया कि लोकल कस्टमर्स द्वारा 35-45 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से फूलों को खरीद लिया जाता है जबकि मार्केट में एक फूलों का बंडल 200- 250 रुपए में बिक जाता है. इस खेती में हर सप्ताह कमाई होती है.
उन्होंने बताया कि सर्द मौसम के बावजूद भी फूलों की खेती में कोई बीमारी नहीं आती है. हालांकि, गर्मी के मौसम में हर 10 दिन बाद कीटनाशक दवाओं का स्प्रे करना पड़ता है. इस मौसम में लागत थोड़ी बढ़ जाती है, लेकिन गर्मियों में बाजार में डिमांड के चलते कमाई भी बढ़िया हो जाती है. परम्परागत खेती की बजाय यह खेती किसानों के लिए काफी फायदे का सौदा रहती है.
हरियाणा सरकार देती है प्रशिक्षण
हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति की बदौलत ही आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर बागवानी और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इसके लिए सरकार द्वारा धरातल पर विभिन्न योजनाएं भी चलाई गई है. वहीं, बागवानी संस्थानों में आधुनिक खेती के प्रशिक्षण से लेकर खेती करने के आधुनिक उपकरणों को आसानी से उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके साथ ही, बागवानी और ऑर्गेनिक खेती करने पर किसानों को सब्सिडी राशि का लाभ दिया जा रहा है.