चंडीगढ़ | पराली की समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में हरियाणा की मनोहर सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. प्रदेश सरकार गेहूं, धान, कपास की तर्ज पर पराली को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की योजना बना रही है. सीएम मनोहर लाल ने इस बारे में बयान देते हुए कहा कि बहुत जल्द इस बारे में निर्णय लिया जाएगा. बता दें कि सीएम मनोहर लाल दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदुषण नियंत्रण पर हो रही बैठक में शिरकत करने पहुंचे थे. इस दौरान उनके साथ केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे.
बैठक के दौरान सीएम मनोहर लाल ने कहा कि उनकी सरकार पराली जलाने के स्थायी समाधान पर काम कर रही है और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की पराली खरीदने की योजना बना रही है. इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी और साथ ही पराली जलाने की समस्या से छुटकारा मिलेगा. बता दें कि प्रत्येक वर्ष अक्टूबर- नवंबर में दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में प्रदुषण का स्तर बेहद ख़तरनाक श्रेणी में पहुंच जाता है और इसके लिए पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना सबसे बड़ी वजह माना जाता है.
इस बैठक के दौरान केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पराली जलाने के मामलों में कमी लाने के लिए राज्य सरकारों को सकारात्मक प्रयास करने होंगे. उन्होंने कहा कि किसानों को मजबूरी में पराली जलानी पड़ती है क्योंकि ज्यादातर किसानों के पास पराली प्रबंधन का कोई साधन नहीं होता है. ऐसे में राज्य सरकारों को इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा और पराली प्रबंधन का स्थायी समाधान निकालना होगा.
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम मनोहर लाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा इन-सीटू मैनेजमेंट के तहत किसानों को प्रति एकड़ बेलिंग के लिए 1,000 रुपए और बेलर्स के परिवहन के लिए 500 रुपए प्रति एकड़ अधिकतम 15 हजार रुपए तक गोशालाओं को दिए जा रहे हैं.
अवशेष प्रबंधन की आपूर्ति के लिए पानीपत में स्थापित 2जी इथेनॉल संयंत्र को एक हजार रुपए प्रति मीट्रिक टन सहायता प्रदान की जा रही है. इसके अलावा पराली प्रबंधन के लिए पिछले 4 सालों में किसानों को सीएचसी के माध्यम से और व्यक्तिगत रूप से 72,777 मशीनरी उपलब्ध करवाई गई है. इस साल 7,146 मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं.
