भिवानी | परिवार का असली अर्थ तब समझ आता है, जब कोई अपनों के लिए बलिदान देने को तैयार हो. कुछ ऐसा ही एक मामला हरियाणा के भिवानी जिले से सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने ससुर के लिए लीवर डोनेट कर बहुत बड़ा बलिदान दिया है. उनके यह कदम चौतरफा सुर्खियां बटोर रहा है और हर कोई उनकी तारीफ करते नही थक रहा है.
ससुर की बचाई जिंदगी
सिविल जज सीनियर डिविजन के पद पर कार्यरत भिवानी जिले के जोगेंद्र सिंह के पिता कृष्ण कुमार सालों से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. डाक्टरों ने लीवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी, लेकिन डोनर ना मिलने की वजह से पूरा परिवार चिंतित था. ऐसे मुश्किल वक्त पर घर की बहू यानि जोगेंद्र सिंह की पत्नी कुसुम ने अपने ससुर की जिंदगी बचाने के लिए लीवर डोनेट करने का साहसिक कदम उठाया.
जब कुसुम ने लीवर डोनेट करने की इच्छा जताई तो परिवार के सदस्यों ने कहा कि ये जोखिम भरा फैसला है, लेकिन कुसुम अपने फैसले पर अडिग रही. कुसुम ने कहा कि उन्होंने मुझे बेटी की तरह अपनाया है, मेरा भी फर्ज बनता है मैं उनकी जिंदगी बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करूं. कुसुम ने पिता तुल्य ससुर को लीवर देकर उन्हें नए जीवन की शुरूआत का मौका दिया है.
अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
कुसुम ने जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे अपने ससुर को लीवर डोनेट कर न केवल अपने परिवार की खुशियों को जिंदा रखा है बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत बन गई है. कुसुम की इस नेक पहल की चारों ओर सराहना हो रही है. आज के जमाने में जहां बहू और सास- ससुर के बीच रिश्तों में अनबन की खबरें सामने आती रहती है, तो वहीं दूसरी ओर कुसुम ने अपने ससुर के लिए लीवर डोनेट कर समाज के सामने नया उदाहरण पेश किया है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हर कोई कुसुम के साहसिक कदम की तारीफ करते नही थक रहा है.
