जींद | आज 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के अवसर पर जहां हर ओर महिलाओं से जुड़ी कहानियां साझा की जा रही हैं. वहीं, कई ऐसी कहानियां भी हैं जो या तो कभी हाईलाइट नहीं हो पातीं और गुमनामी के अंधेरे में खो जाती हैं या फिर उन्हें सामने आने में काफी समय लग जाता है. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के जींद जिले के सफीदों क्षेत्र के गांव हाडवा की निशु देशवाल की.
सोशल मीडिया पर कर रही ट्रेंड
निशु की कहानी खास इसलिए है क्योंकि वह आज लाखों महिलाओं और लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं. उन्हें सोशल मीडिया सेंसेशन कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. आज वह सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं और उनके इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोवर्स भी हैं. निशु की कहानी इसलिए प्रेरणादायक है, क्योंकि जब उनके पिता मुकेश कुमार की दोनों पैरों की नसें जाम हो गईं, तो मजबूरी में निशु ने उनकी लोडिंग पिकअप गाड़ी का स्टेयरिंग थाम लिया. अक्सर वह इन गाड़ियों को बुकिंग पर लेकर आती- जाती नजर आती रहती हैं. आसपास के सभी लोग उन्हें ‘ड्राइवर छोरी’ के नाम से जानते हैं.
हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर बनने का सपना
पिल्लूखेड़ा के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की और घर की मजबूरियों को देखते हुए गाड़ी चलाने का काम संभाल लिया. हालांकि, उनका सपना हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर की नौकरी करने का है. निशु की मां सुमनलता ने बताया कि छठी कक्षा से ही वह घर के कामकाज बखूबी संभाल लेती थी. वह मेहनती और ईमानदार है. इसके अलावा, वह खेत के सभी कामों को भी आसानी से कर लेती है.
वह पशुओं के लिए चारा लाने, चारा काटने, दूध दोहने और बाकी काम भी कर लेती हैं. सुमनलता ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है. उनका खुद का 4 बार ऑपरेशन हो चुका है, जिस कारण वह घर के काम नहीं कर पातीं. हालांकि, उन्हें भी गाड़ी चलानी आती है.
बुराई करने वाले आज करते हैं गर्व
निशु के पिता को रीढ़ की हड्डी में दिक्कत है, जिस कारण वह लंबे समय तक एक जगह नहीं बैठ पाते. निशु का भाई मनदीप प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है. ऐसे में पिता की गाड़ी का स्टेयरिंग निशु ने संभाला. शुरू में आसपास के गांवों में पशुओं को छोड़ने के लिए निशु गाड़ी लेकर जाती थी, लेकिन अब वह दूसरे राज्यों में भी गाड़ी बुकिंग पर लेकर जाती है.
निशु की मां बताती हैं कि आज हालात ऐसे हैं कि जो लोग पहले उसकी पीठ पीछे बुराई करते थे, वे आज उस पर गर्व करते हैं. निशु कहती हैं कि उनमें हमेशा खुद से कुछ नया करने का जुनून रहा है, जिसमें उनकी मां ने उन्हें हौसला दिया है.
