चंडीगढ़ | वन क्षेत्र को सुरक्षित करने की दिशा में हरियाणा सरकार द्वारा एक बड़ा फैसला लिया गया है. अब वनों की परिभाषा और पहचान के मानदंडों में सरकार द्वारा नीतिगत बदलाव किया गया है. इसके तहत, अब एग्रो फॉरेस्ट प्लांटेशन और गार्डन भी वन का हिस्सा माने जाएंगे. इन से जुड़े नियमों में बदलाव करने के साथ ही तीन शर्तें लगाई गई हैं. इसी कड़ी में 2 कमेटियों का निर्माण कार्रवाई के लिए कर दिया गया है. इन बदलाव के तहत, वह पेड़ भी दायरे में आएंगे जो प्राइवेट जमीनों पर लगे हुए हैं.
वन की परिभाषा में जुड़े नए मानदंड
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कोई जमीन का टुकड़ा एक डिक्शनरी मीनिंग के अनुसार वन तभी माना जाएगा जब वह निश्चित शर्तों को पूरा करेगा. इसके तहत, जमीन का वह टुकड़ा अलग- थलग होना चाहिए और कम से कम 5 हेक्टेयर भूमि पर फैला हुआ हो. अगर सरकार द्वारा नोटिफाई वनों से वह सटा हुआ है, तो उसका न्यूनतम क्षेत्रफल 2 एकड़ होना चाहिए. साथ ही उसका कैनोपी डेंसिटी 0.4 से कम नहीं होना चाहिए.
कमेटियों का हुआ गठन
सरकार अब वन डिफिनिशन के बाद उन जमीनों को चिन्हित करेगी, जो इसके अंतर्गत आते हैं. इसके लिए 2 कमेटियों का निर्माण किया गया है, जो इस मामले में प्रस्ताव भेजेंगी और अपनी सिफारिशें देंगी. मुख्य सचिव वन भूमि की नोटिफिकेशन के बाद सर्वोच्च न्यायालय (SC) में एक हलफनामा दायर करेंगे. बताते चलें कि नए नियमों के तहत वनों के बाहर स्थित सभी लीनियर, कॉम्पैक्ट, एग्रो फॉरेस्ट प्लांटेशन और बागों को वन नहीं माना जाएगा.
