जींद | हरियाणा में शिक्षा विभाग की तरफ से जींद जिले में ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए एक नई शुरुआत की गई है. विभाग की तरफ से शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह टीम बनाकर घर- घर जाकर ऐसे बच्चों की खोज करेंगे जिन्होंने किसी कारण से पढ़ाई छोड़ दी है या फिर स्कूल में नाम दर्ज होने के बाद भी नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे हैं.
9 जनवरी तक चलेगा हरियाणा में अभियान
शिक्षा विभाग के इस नए अभियान की शुरुआत एक जनवरी से होगी और यह अभियान 9 जनवरी तक चलेगा. इस बार विभाग ने लक्ष्य रखा है कि 300 ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से स्कूलों में नामांकन कराकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जाए. अभियान के तहत शिक्षकों को क्षेत्रवाइज घरों में जाकर बच्चों से बातचीत कर उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाना होगा. शिक्षकों को यह वजह जाननी होगी कि आखिर बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं.
शिक्षकों का रहेगा यह दायित्व
शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अभियान के दौरान शिक्षकों को केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहना बल्कि बच्चों और उनके परिजनों को पढ़ाई के महत्व के बारे में समझाकर उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ने के लिए प्रेरित करना भी उनका दायित्व रहेगा. जिन बच्चों का नाम किसी वजह से स्कूल से कट चुका है, उनका पुनः नामांकन कराया जाएगा. जो बच्चे आर्थिक या सामाजिक कारणों के चलते स्कूल नहीं आ पा रहे, उनके लिए विभाग की तरफ से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी परिवारों को प्रदान की जाएगी.
कई बच्चे आर्थिक तंगी, पारिवारिक मजबूरियों, बाल श्रम, प्रवास, पढ़ाई में रुचि की कमी या अन्य सामाजिक कारणों से स्कूल छोड़ देते हैं, शिक्षकों को ऐसे बच्चों की पहचान करनी होंगी व उन्हें दोबारा स्कूल तक लाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रहेगा. इसके लिए अध्यापकों बीआरपी, सीआरपी, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्कूल प्रबंधन समितियों की सहायता लेनी होगी.
ब्लॉक और स्कूल लेवल पर बनी टीम
शिक्षा विभाग की तरफ से इस अभियान के लिए ब्लॉक और स्कूल स्तर पर टीमें बनाई गई हैं. प्रत्येक टीम में संबंधित स्कूल के शिक्षक व अधिकारी शामिल होंगे. शिक्षकों को यह भी कहा गया है कि वे क्षेत्र में रहने वाले प्रवासी परिवारों, मजदूर वर्ग और अस्थायी बस्तियों का विशेष रूप से सर्वे करें, क्योंकि यह ऐसे स्थान है जहां पर ज्यादा बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं. इस अभियान के तहत ड्रॉपआउट बच्चों के नाम, आयु, अभिभावक, पता, पिछली पढ़ाई से जुड़ी जानकारी व स्कूल छोड़ने की वजह को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा.
अभियान के तहत ड्रॉपआउट बच्चों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जाएगी. ड्रापआउट बच्चों को पढ़ाने के लिए 30 सेंटर चल रहे हैं. सभी अभिभावकों से आग्रह है कि बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए सभी अभिभावक अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें- रितु पंघाल, जिला शिक्षा अधिकारी, जींद
