कैथल | अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी का असर भारत के चावल कारोबार तक दिखाई देने लगा है. इंटरनेशनल स्तर पर सप्लाई प्रभावित होने से चावल निर्यातकों को भुगतान मिलने में देरी हो रही है, जिसके चलते निर्यातक नए ऑर्डर लेने से हाथ पीछे खींच रहे हैं. इसके चलते मार्केट में असमंजस का माहौल बना हुआ है और बासमती चावल के भाव में गिरावट दर्ज हुई है.
भारत के चावल कारोबार पर असर
चावल कारोबारियों का कहना है कि ईरान लंबे समय से भारतीय बासमती चावल का बड़ा आयातक रहा है. वहां 1121 व 1718 किस्म की अच्छी- खासी डिमांड रहती है, लेकिन वर्तमान में पनपे राजनीतिक और आर्थिक संकट के चलते भुगतान अटकने और शिपमेंट में देरी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. इसका सीधा असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ा है.
पहले हर रोज नए ऑर्डर लिए जाते थे लेकिन अब निर्यातक जोखिम उठाने से बच रहे हैं. भुगतान को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते फिलहाल पुराने ऑर्डर पूरे करने पर ही ध्यान दिया जा रहा है.
चावल की कीमतों में गिरावट
एक अन्य व्यापारी ने बताया कि 1121, 1718 और 1509 किस्म के बासमती चावल की कीमतों में 5- 10 रुपए प्रति किलो तक गिरावट आई है. जो चावल पहले 70- 75 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा था, वह अब 65- 68 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है. इन हालातों ने किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंताएं बढ़ा दी है. उन्होंने कहा कि यदि हालातों में सुधार नहीं हुआ तो कीमतों में आगे और गिरावट देखने को मिल सकती है. ईरान के आर्थिक संकट के चलते निर्यातकों की बड़ी पूंजी लटक गई है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना जताई जा रही है.
