करनाल | हरियाणा की युवा प्रतिभा में टेलेंट कूट- कूट कर भरा हुआ है. कुछ ऐसे ही हुनर का परिचय करनाल जिले में जन्मी हिमांशी चौहान दे रहीं हैं, जिसने महज 2 साल की उम्र में ही रंगों की दुनिया से प्यार करना सीख लिया था. आज पेंटिंग में उनकी निपुणता देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी उन्हें एक नई पहचान दिला रही है. अब हिमांशी (Himansi) का सपना अपनी कला के माध्यम से इंटरनेशनल लेवल पर खुद को साबित करना है, जिसके लिए वो निरंतर अभ्यास कर रही है.
गिनीज और लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम
हिमांशी चौहान ने 150 से ज्यादा देशों में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व किया है. साल 2011 में उन्होंने जापान में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त किया और नए रिकॉर्ड को अपने नाम किया. 2013 और 2022 में हिमांशी ने लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में रिकॉर्ड स्थापित किया. उनकी इस उपलब्धियों के पीछे कड़ी मेहनत और लगन सहित उनके परिजन खासकर अंकल रणदीप चौहान का विशेष तौर पर सहयोग रहा है.
परिजनों को सफलता का श्रेय
हिमांशी चौहान ने अपनी सफलता का श्रेय अपने अंकल रणदीप चौहान और अपनी माता को दिया है. हिमांशी ने बताया कि उनके चाचा ने उन्हें हर मुश्किल समय में प्रेरित करते हुए उनकी कला को निखारने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने अपनी पेंटिंग्स की बदौलत सिल्वर मेडल और रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड जैसे कई पुरस्कार जीते हैं. उन्होंने पेंटिंग के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई का किरदार निभाकर इस पुरस्कार को जीता है.
भविष्य की योजनाएं
करनाल में जन्मी हिमांशी चौहान का परिवार मूल रूप से UP के शामली जिले से हैं. बचपन से ही पेंटिंग को अपना शौक बनाने वाली हिमांशी ने अपनी मेहनत और लगन से कला के क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया है. उन्होंने बताया कि अभी उन्हें बहुत कुछ हासिल करना है. उनका लक्ष्य विश्वभर में हिंदुस्तान का नाम रोशन करना है.
