करनाल | हरियाणा में अपनी क्वालिटी, खुशबू और स्वाद की वजह से देश- दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके 1121 बासमती धान एक बार फिर सुर्खियों में हैं. जीटी रोड बेल्ट के करनाल क्षेत्र और फतेहाबाद जिले के टोहाना क्षेत्र में इस किस्म के धान की सबसे ज्यादा खेती होती है. प्रीमियम किस्मों में इसकी गिनती होने के चलते ही इसकी कीमत भी सामान्य चावल की तुलना में बहुत अधिक रहती है. यह प्रोडेक्ट मार्केट में हर वक्त डिमांड में रहता है.

बेमिसाल स्वाद और सुगंध
लंबे दानों के चलते 1121 बासमती चावल की खासियत और ज्यादा बढ़ जाती है. पकने के बाद इसका दाना 20- 22 मिमी तक लंबा हो जाता है, जो इसके प्रति आकर्षण को और ज्यादा बढ़ाता है. इसकी प्राकृतिक सुगंध और स्वाद लोगों के सिर चढ़कर बोलता है. यहीं वजह है कि ये चावल भारत के साथ- साथ इंटरनेशनल स्तर पर भी खूब आयात होता हैं और विदेशी ग्राहकों के बीच इसकी अच्छी डिमांड रहती है.
हरियाणा की बात करें तो करनाल जिले को धान का कटोरा कहा जाता है क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल की खेती होती है. कैथल, टोहाना और गन्नौर क्षेत्र में भी बड़े रकबे पर इसकी खेती की जाती है. इन इलाकों की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और अनुकूल जलवायु इस चावल की गुणवत्ता को और बेहतर बनाती है, जिससे इसकी पैदावार और लोकप्रियता दोनों बढ़ जाती है.
किसानों की आय का बड़ा स्त्रोत
करनाल में एशिया की सबसे बड़ी चावल मंडी हैं, जहां बड़े स्तर पर 1121 चावल का कारोबार होता है. यहां से ये चावल देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों में भेजा जाता है. इस किस्म की खेती भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती है क्योंकि इसका भाव 4- 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक रहता है जिससे किसानों को अच्छा-खासा मुनाफा मिलता है. इस किस्म की खेती हरियाणा की अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है.