सरकार ने दिया 6 करोड़ कर्मचारियों को बड़ा झटका, PF पर घटाई ब्याज दरे

नई दिल्ली | सरकार की तरफ से वित्त वर्ष 2021 -22 के लिए PF अकाउंट में जमा राशि पर 8.5 % की बजाए 8.10% की दर से ब्याज देने के फैसले को मंजूरी दे दी गई है. EPFO (एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन) की तरफ से शुक्रवार को इसका ऑफिस ऑर्डर जारी किया गया. बता दें कि ब्याज की यह दर पिछले 40 सालों में सबसे कम है.

EPFO

सरकार ने दिया 6 करोड़ कर्मचारियों को बड़ा झटका 

1970- 78 में EPFO की तरफ से 8% ब्याज दिया गया था. उसके बाद से 8.25% या इससे ज्यादा ही ब्याज दिया जा रहा है. यदि पिछले दो फाइनेंशियल ईयर की बात करें तो ब्याज दर 8.5% रही. बता दे कि देश में ऐसे 6 करोड कर्मचारी है, जो पीएफ के दायरे में आते हैं. EPFO एक्ट के तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी प्लस DA का 12 % पीएफ अकाउंट में जाता है. कंपनी भी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी प्लस DA का 12 % कंट्रीब्यूट करती है.

पिछले 40 सालों में सबसे कम ब्याज दर 

कंपनी के 12 % कॉन्ट्रिब्यूशन में से 3.67% कर्मचारियों के पीएफ अकाउंट में जाता है, बाकि बचा हुए 8.33% कर्मचारी पेंशन स्कीम में जाता है. मान लीजिए आपके पीएफ अकाउंट में 31 मार्च 2022 तक कुल 5 लाख रूपये जमा है, ऐसे में यदि आपको 8.5% की दर से ब्याज मिलता है तो 5 लाख पर आपको 42500 रूपये ब्याज के रूप में मिलेंगे. अब इस ब्याज दर को घटाकर 8.10 % कर दिया है इसके बाद आपको 40,500 रूपये का ब्याज मिलेगा.

यह भी पढ़े -   पर्सनल लोन चाहिए तो अच्छा सिबिल स्कोर है जरूरी, जानें चेक करने की पूरी प्रक्रिया

इस समय मिलता था कर्मचारियों को सबसे ज्यादा ब्याज 

1952 में पीएफ पर ब्याज दर केवल 3 % ही थी, उसके बाद इसमें समय के साथ बढ़ोतरी होती गई. पहली बार 1972 में यह 6% के ऊपर पहुंच गई और 1984 में यह 10 % पहुंच गई. वही पीएफ धारकों के लिए सबसे अच्छा समय 1989 से 1999 तक का था, इस दौरान उन्हें पीएफ पर 12 % ब्याज मिलता था. 1999 के बाद ब्याज दर कभी भी 10% के करीब नहीं पहुंची. 2001 के बाद से यह 9.5 के नीचे ही रही, पिछले 7 सालों से यह 8.5 या इससे कम रही.

यह भी पढ़े -   Sidhu Murder Case: मूसेवाला की हत्या करने के बाद हत्यारों ने मनाया था जशन, यहाँ देखे वायरल विडियो

यदि पिछले दो फाइनेंसियल ईयर की बात की जाए तो यह ब्याज दर 8.5% थी. पीएफ में ब्याज दर के फैसले के लिए सबसे पहले फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड अथॉरिटी कमेटी की बैठक होती है. यह इस फाइनेंशियल ईयर में जमा हुए पैसे के बारे में हिसाब देती है. इसके बाद सीबीटी की बैठक होती है. सीबीटी के फैसले के बाद ही वित्त मंत्रालय सहमति के बाद ब्याज दर लागू की जाती है.

हमें Google News पर फॉलो करे- क्लिक करे! हरियाणा की ताज़ा खबरों के लिए अभी हमारे हरियाणा ताज़ा खबर व्हात्सप्प ग्रुप में जुड़े!