नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से आमजन की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आई है. इसी कड़ी में द्वारका और इसके साथ लगते आसपास के इलाकों में जलापूर्ति की समस्या झेल रहे लोगों को बहुत जल्द राहत मिलने जा रही है. यहां पानी की किल्लत दूर करने के लिए 50 एमजीडी क्षमता के द्वारका जल शोधन संयंत्र के संचालन के लिए कच्चे पानी की पुनर्वितरण योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है.
बड़ी आबादी को राहत
ओखला, वजीराबाद, निलोठी और द्वारका के प्रमुख ट्यूबवेल में उपलब्ध भूजल संसाधनों के माध्यम से यहां निर्बाध कच्चे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. इससे द्वारका एवं आसपास के इलाकों में पानी की आपूर्ति में सुधार आयेगा. जल बोर्ड की प्रस्तावित योजना के अनुसार कुल 228 ट्यूबवेल से 22.8 एमजीडी कच्चा पानी निकाला जाएगा. इसकी आपूर्ति ओखला, वजीराबाद, नांगलोई और नए द्वारका जल शोधन संयंत्र में की जाएगी. यह पूरी प्रणाली मौजूदा जल ढांचे को प्रभावित किए बिना कच्चे पानी के स्रोतों का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करेगी.
इस महत्वपूर्ण पहल को लेकर जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी को बहाने नहीं, बल्कि आधुनिक जल संसाधन चाहिए. 50 एमजीडी क्षमता वाले द्वारका जल शोधन संयंत्र का संचालन राजधानी की भविष्य की जल आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है.
इन इलाकों को तगड़ा फायदा
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 50 एमजीडी द्वारका जल शोधन संयंत्र के संचालन के बाद द्वारका, नजफगढ़, पालम, डाबड़ी और आसपास के क्षेत्रों में जलापूर्ति में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा. इन क्षेत्रों में लंबे समय से पानी की किल्लत बनी हुई थी. जल दबाव में कमी की समस्या आ रही थी, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट से इसका स्थाई रूप से समाधान हो जाएगा. नया संयंत्र से दिल्ली की बाहरी जल स्त्रोतों से निर्भरता कम होगी और पश्चिम एवं दक्षिण- पश्चिम दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था में स्थिरता आएगी.
