रोहतक | कहते हैं इंसानियत की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है. अक्सर आपने PGI से वीआरएस लेकर डॉक्टरों को मोटे पैकेज पर बड़े- बड़े अस्पतालों में काम करते हुए देखा होगा, लेकिन अच्छी- खासी सैलरी को ठोकर मारकर मरीजों की मुफ्त में सेवा करने वाला डॉक्टर नहीं देखा होगा. हम यहां एक ऐसे ही डाक्टर का जिक्र करेंगे, जिन्होंने साल 2014 में पीजीआई से वीआरएस लेकर रोहतक में मरीजों की सेवा को ही अपनी दिनचर्या बना लिया.
फ्री इलाज कर कमा रहे पुण्य
डॉ. आरएस दहिया हर मंगलवार व शुक्रवार को निशुल्क ओपीडी चलाते हैं. डॉ दहिया रोहतक के किशनपुरा चौपाल में मंगलवार व शुक्रवार को सुबह 10 से 12 बजे तक व हुमांयूपुर में मंगलवार को दोपहर एक से 3 बजे तक निशुल्क मरीजों की जांच करते हैं. 75 साल की उम्र पार कर चुके दहिया ने बताया कि मरीजों की सेवा के प्रति आज भी उनके जज्बे में कोई कमी नहीं आई है.
यहीं नहीं डॉ. दहिया नियमित ओपीडी के अलावा जहां जरूरत होती है, वहां पर भी निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाने पहुंच जाते हैं. इसके लिए बाकायदा उनकी एक टीम है, जिसमें फार्मासिस्ट सहित अन्य सहयोगी मेंबर्स है.
वीआरएस की बताई वजह
डॉ. दहिया ने बताया कि पीजीआई में जब मरीजों को उचित इलाज नहीं मिलता था, तो वे अंदर से बहुत दुखी होते थे. इलाज सबका अधिकार है, लेकिन कुछ बंदिशें थी, जो बर्दाश्त नहीं की जा सकती. स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारों की नीयत में खोट है. पीएचसी और सीएचसी खुद बीमार है, पीजीआई में पर्याप्त स्टाफ की कमी से लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिलता है. स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारें गंभीर नहीं है, इसलिए वीआरएस लेना पड़ा.
गरीबों की सेवा उद्देश्य
डॉ आरएस दहिया ने बताया कि पैसा कमाना नहीं, बल्कि गरीबों को मुफ्त में बेहतर इलाज उपलब्ध कराना उनका सबसे बड़ा उद्देश्य है. उनकी चाहत है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मिशन मोड में लें, ताकि लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलें. यही सोचकर वे पिछले 3 साल से ओपीडी का संचालन कर रहे हैं, जहां पूरे प्रदेश से लोग इलाज और सलाह के लिए आते हैं.
उन्होंने कहा कि डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज के समय में इलाज बहुत महंगा हो चुका है. पैसा इलाज और मरीज के बीच बहुत बड़ा फासला पैदा कर रहा है. पैसों की तंगी से लोगों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाता है, जिसके चलते कई लोगों को जान तक गंवानी पड़ती है. सरकार को इसकी सुध लेनी चाहिए.
