गुरुग्राम | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां अरावली पहाड़ियों के साथ लगते घाटा और वजीराबाद गांव की करीब 750 एकड़ भूमि पर मातृ वन विकसित किया जाएगा. शनिवार को केंद्रीय उर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भुपेंद्र यादव ने सेक्टर- 54 में मातृ वन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़- पौधे लगाकर शहर को प्रदुषण से मुक्ति दिलाना है.
इन प्रजातियों के लगेंगे पौधे
वन विभाग की ओर से 750 एकड़ भूमि पर विकसित किए जाने वाले मातृ वन में स्थानीय प्रजाति के पौधों जैसे बड़, पीपल, नीम और गुल्लर जैसे पौधे लगाए जाएंगे. संभावना जताई गई है कि 10 सालों में मातृ वन से बहुत ही शानदार परिणाम देखने को मिलेगा. गुरुग्राम शहर से पर्यावरण प्रदुषण कम करने में यह मातृ वन महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा.
बताया जा रहा है कि मातृ वन के लिए जिन जगहों का चुनाव किया गया है, उन पर वर्तमान में ज्यादा संख्या में काबुल कीकर लगा हुआ है लेकिन अब यहां पर बरगद, पीपल, गुल्लर, बेस पत्र, ईमली, पिलखन, नीम, बांस, फूल और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे. इसके अलावा मातृ वन में नक्षत्र वाटिका, राशि वाटिका, कैक्टस गार्डन और बटरफ्लाई पार्क भी बनाए जाएंगे.
आज गुरुग्राम में एक पेड़ माँ के नाम कार्यक्रम के अंतर्गत ‘मातृ वन’ के शिलान्यास समारोह में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री @byadavbjp जी तथा हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह जी के साथ सहभागिता करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
माँ के आँचल के छाँव सी शीतलता देता है… pic.twitter.com/lxxVoVnBRb
— Manohar Lal (@mlkhattar) August 2, 2025
तितली पार्क होगा विकसित
मातृ वन प्रोजेक्ट के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि गुरुग्राम लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है और अब इसे स्वच्छ और प्रदुषण मुक्त बनाने के लिए प्रकृति से जोड़ा जा रहा है. यहां पर पेड़- पौधे लगाकर उनकी अच्छी तरह से देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए कोयले की जगह हाइड्रो, सोलर, न्यूक्लियर एनर्जी जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है.
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भुपेंद्र यादव ने बताया कि हरियाणा वन विभाग से कोयम्बतूर की तर्ज पर तितली पार्क विकसित करने का फैसला लिया गया है, जिसमें औषधीय पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी.
