चंडीगढ़ | हरियाणा की जुलाना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायिका विनेश फोगाट ने फिर से कुश्ती में लौटने का ऐलान कर सभी को चौंका दिया है. उन्होंने बताया कि 2028 में लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में वह हिस्सा लेना चाहती है और इसके लिए उन्होंने अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने इस बात की जानकारी दी है.
लिखी यह बातें
विनेश फोगाट ने X पर लिखा, ‘लोग पूछते है कि क्या पेरिस अंत था. बहुत समय तक मेरे पास इसका जवाब नहीं था. मुझे मैट से, दबाव से, उम्मीदों से और यहां तक कि मुझे अपने सपनों से भी दूर जाने की जरूरत थी. सालों में, पहली बार मैंने खुद को सांस लेने दिया. मैंने अपने सफर के बोझ को समझने के लिए समय लिया, उतार-चढ़ाव, दिल टूटना, मेरे वो रूप जिन्हें दुनिया ने कभी नहीं देखा, और कहीं उस सोच में मुझे सच मिला, मुझे आज भी कुश्ती का खेल पसंद है. मैं अब भी मुकाबला करना चाहती हूं.’
— Vinesh Phogat (@Phogat_Vinesh) December 12, 2025
उन्होंने आगे लिखा कि उस खामोशी में मुझे कुछ ऐसा मिला जिसे मैं भूल गई थी. ‘आग कभी खत्म नहीं होती’. यह सिर्फ थकान और शोर के नीचे दब गया था. अनुशासन, रूटीन, लड़ाई… यह सब मेरे सिस्टम में है. मैं कितना भी दूर चली जाऊं, मेरा एक हिस्सा मैट पर बना रहा. तो मैं यहां हूं, लॉस एंजेलिस 28 की ओर एक ऐसे दिल के साथ वापस कदम बढ़ा रही हूं जो निडर है और एक ऐसी भावना जो झुकने से मना करती है और इस बार मैं अकेली नहीं चल रही हूं, मेरा बेटा मेरी टीम, मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा, लॉस एंजेलिस ओलिंपिक के इस रास्ते पर मेरे छोटे चीयरलीडर के साथ शामिल हो रही हूं.
100 ग्राम ज्यादा वजन से टूटा सपना
साल 2024 में पेरिस में हुए ओलंपिक खेलों में विनेश फोगाट ने लगभग इतिहास रच ही दिया था. वह ओलंपिक खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थी. उस समय उनकी फॉर्म को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि वह गोल्ड मेडल जीतेगी, लेकिन फाइनल मैच से कुछ घंटे पहले उनका वजन 100 ग्राम ज्यादा पाया गया. इसके चलते उन्हें फाइनल मुकाबले से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. पेरिस ओलंपिक खेलों से डिसक्वालिफाई होने के 17 घंटे बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी.
उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा था- ‘मां कुश्ती मेरे से जीत गई, मैं हार गई. माफ करना आपका सपना, मेरी हिम्मत सब टूट चुके हैं. इससे ज्यादा ताकत नहीं रही अब. अलविदा कुश्ती 2001- 24, आप सबकी हमेशा ऋणी रहूंगी, माफी.’
