चंडीगढ़ | हरियाणा की हजारों आशा वर्करों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. इन आशा वर्करों की यूनियन ने प्रधान सुनीता के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से मुलाकात की है और सालों से अनुबंध आधार पर कार्यरत आशा वर्करों को पक्की नौकरी और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की हैं. आशा वर्करों की यूनियन ने स्वास्थ्य मंत्री को सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए यह मांग की हैं.

हरियाणा में इस समय 20 हजार से ज्यादा आशा वर्कर सेवाएं दे रही है और इनमें से करीब 17 हजार आशा वर्कर ऐसी हैं जिन्हें नौकरी करते हुए 10 साल से ज्यादा का समय हो चुका है.
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
गत दिनों हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सालों से संविदा आधार पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत आई है. जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि सालों से अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कार्य अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का होता है. इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित किया जाना चाहिए और सभी सेवा लाभ दिए जाएं. NHM केंद्र प्रायोजित योजना हैं जिसमें 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य सरकार वित्तीय भार वहन करते हैं.
हाईकोर्ट ने ठुकराई दलीलें
हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में दलील थी कि नियमित पद स्वीकृत नहीं है और हाईकोर्ट नियमितीकरण का आदेश देकर नए पद सृजित नहीं कर सकती हैं लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से हुई हो, कर्मचारी योग्य हों और सालों तक बिना किसी अदालत के संरक्षण के सेवा दे रहे हों तो राज्य उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी नहीं रख सकता. स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने आशा वर्करों की इस मांग पर सहमति जताई और NHM महानिदेशक RS ढिल्लों को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा.
आशा वर्करों की प्रमुख मांगे
- जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के काटे हुए मानदेय को तुरंत बहाल/लागू किया जाए.
- साल 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 रुपए की मानदेय बढ़ोतरी को एरियर सहित दिया जाए.
- मानदेय सहित मेडिकल लीव और मैटरनिटी लीव की सुविधा मिलनी चाहिए.
- सभी आशा वर्करों और उनके परिवारों को सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त/कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए.
- पारदर्शिता के लिए हर महीने सभी आशा वर्कर्स को उनके मानदेय भुगतान की स्लिप दी जाए.
- फेस्टिवल पर त्यौहार भत्ते का लाभ मिलना चाहिए.
- साल 2023 की 73 दिवसीय हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय का भुगतान किया जाए.