गुरुग्राम | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम शहर से एक अच्छी खबर सामने आई है. यहां बरसाती सीजन में सड़कों पर जलभराव की समस्या को स्थाई रूप से खत्म करने की योजना बनाई गई है और इसके लिए नगर निगम ने प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान IIT गांधीनगर के साथ हाथ मिलाते हुए एक साल का MoU साइन किया है.
इस योजना के तहत IIT के विशेषज्ञों की टीम गुरुग्राम शहर में रहकर पूरे ड्रेनेज सिस्टम का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए एक दीर्घकालिक मास्टर ड्रेनेज मॉडल तैयार करेगी. यह टीम शहर के हर जलभराव वाले पाकेट, नालों, बरसाती जलमार्गों और मौजूदा निकासी संरचनाओं का मैपिंग आधारित तकनीकी अध्ययन करेगी. यह टीम विभिन्न बिंदुओं पर काम करेगी…
तकनीकी सुझाव
वर्तमान ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता, डिजाइन और कमियों का विस्तृत आंकलन किया जाएगा और किस इलाके में किस तरह की इंजीनियरिंग समाधान से पानी की निकासी बेहतर होगी, इसकी चरणबद्ध तरीके से तकनीकी रूपरेखा तैयार होगी. इसके बाद भविष्य में तैयार होने वाली सभी नगर निगम योजनाएं इसी वैज्ञानिक मॉडल पर आधारित होगी, जिससे बजट और संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा.
टीम को सौंपा पूरा डेटा
नगर निगम ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए IIT की टीम को शहर की टोपोग्राफी, ड्रेनेज लाइनें, सीवर कनेक्टिविटी, अतिक्रमण और जलभराव वाले इलाकों का पूरा जीआइएस डेटा हस्तांतरित कर दिया है. विशेषज्ञ अब इन्हीं आंकड़ों के आधार पर हाई-प्रीसिशन माडल तैयार करेंगे.
बता दें कि बरसात होते ही गुरुग्राम शहर के कई इलाकों नरसिंहपुरा, हीरो होंडा चौक, इफको चौक, सेक्टर रोड और कई प्रमुख जंक्शनों पर जलभराव से हालात बेहद खराब हो जाते हैं क्योंकि अनियोजित विकास, संकरे नाले, अतिक्रमण और सीवर मिश्रण की वजह से निकासी क्षमता बेहद कमजोर है. इसलिए अब नगर निगम ने हर साल बड़े पंप और अस्थायी सफाई से काम चलाने की मजबूरी को खत्म करने की योजना बनाते हुए स्थाई समाधान की ओर कदम बढ़ाए हैं.
