अब खाटू श्याम के लिए पंचकूला से शुरू होगी बस सर्विस, परिवहन मंत्री ने दिए आदेश

पंचकूला | परिवहन मंत्री मूलचंद ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि जल्द ही खाटू श्याम के लिए पंचकूला से बस सर्विस शुरू की जाएगी. इसके लिए पंचकूला के महाप्रबंधक को रूट व बस निर्धारित करने के निर्देश दे दिए हैं. बता दें कि खाटू श्याम के लिए बस जींद और रोहतक के लिए पहले से ही चलाई जा चुकी हैं. अब परिवहन मंत्री ने पंचकूला से भी खाटू श्याम के लिए बस चलाने का ऐलान किया है.

Haryana Roadways Bus

खाटू श्याम को माना जाता है कलियुग अवतार

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम को भगवान कृष्ण के कलियुग अवतार के रूप में जाना जाता है. उनका भव्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. लोगों का मानना ​​है कि बाबा श्याम सबकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. बाबा खाटू श्याम का संबंध महाभारत काल से माना जाता है. वे पांडु के पुत्र भीम के पौत्र थे. एक कहानी है कि खाटू श्याम की अपार शक्ति और क्षमता से प्रभावित होकर, श्री कृष्ण ने उन्हें कलियुग में उनके नाम पर पूजा करने का वरदान दिया था. खाटू श्यामजी मेला हर साल होली के दौरान आयोजित किया जाता है.इस मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु बाबा खाटू श्याम के दर्शन के लिए आते हैं.इस मंदिर में भक्तों की गहरी आस्था है.

हर साल होली को होता है मेला आयोजित

वहर महीने की एकादशी को मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने आते हैं. खाटू श्यामजी मेला हर साल होली के दौरान आयोजित किया जाता है. इस देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा खाटू श्याम जी के दर्शन करने के लिए आते हैं. खाटूश्याम मेले का आकर्षण यहां होने वाली मानव सेवा भी है. यहां सभी गरीब और अमीर लोग आम आदमी की तरह आते हैं और भक्तों की सेवा करते हैं. ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

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इस मंदिर में भक्तों की इतनी आस्था है कि वे अपनी सारी खुशी का श्रेय इन्हीं को देते हैं. भक्तों का कहना है कि बाबा खाटू श्याम सभी की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. खाटूधाम में आशा रखने वालों की झोली खाली नहीं रखते बाबा. लोगों का मानना ​​है कि बाबा श्याम सबकी मनोकामना पूरी करते हैं और पद को राजा बना सकते हैं.

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सदियों पुराना है बाबा का मंदिर

ऐसा माना जाता है कि मूल मंदिर का निर्माण 1027 ईस्वी में रूप सिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने करवाया था. मारवाड़ के शासक के निर्देश पर 1720 ई. में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया. उस समय मंदिर ने अपना वर्तमान आकार ले लिया और मूर्ति को गर्भगृह में बदल दिया गया. मूर्ति दुर्लभ पत्थर से बनी है.

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श्याम बाबा की आरती की अनुसूची

ट्रेन खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे
मंगल आरती: सुबह 5:30 बजे
श्रृंगार आरती: सुबह 7:45 बजे
भोग आरती: दोपहर 12:30 बजे
रेल बंद होने का समय: दोपहर 1 बजे
ट्रेन खुलने का समय: शाम 4:00 बजे
ग्वाला आरती: शाम 7:00 बजे
शयन आरती: रात 9:15 बजे
मंदिर बंद होने का समय रात 9:30 बजे

खास मौकों पर समय बदल सकता है. अधिकतर समय यही रहता है.

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