SYL को लेकर हरियाणा-पंजाब की मीटिंग ख़त्म, यहाँ पढ़े क्या रहा नतीजा

चंडीगढ़ | दशकों से सतलुज-यमुना लिंक नहर (SYL) के पानी की बाट जोह रहे हरियाणावासियों की उम्मीदों को आज फिर बड़ा झटका लगा है. बता दें कि आज SYL के मुद्दे को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी. इस बैठक में पंजाब के सीएम भगवंत मान और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल सहित दोनों राज्यों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में एसवाईएल नहर के निर्माण को लेकर बातचीत सिरे नहीं चढ़ पाई.

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बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम मनोहर लाल ने कहा कि एसवाईएल नहर को लेकर हुई बैठक बेनतीजा रही और दोनों राज्यों में इस मुद्दे को लेकर कोई सहमति नहीं बनी हैं. सीएम ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार यह बैठक बुलाई थी और एसवाईएल नहर हरियाणा की संजीवनी है और इसके पानी पर हमारा पूरा हक है. सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर के निर्माण के आदेश दिए हैं लेकिन पंजाब सरकार इन आदेशों को अनदेखा कर रही है.

सीएम मनोहर लाल ने बताया कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधान के अंर्तगत भारत सरकार के आदेश 24.3.1976 के अनुसार हरियाणा को रावी-ब्यास के फालतू पानी में 3.5 एमएएफ जल का आवंटन किया गया था लेकिन एसवाईएल नहर का निर्माण नहीं होने के चलते हरियाणा केवल 1.62 एमएएफ पानी का इस्तेमाल कर रहा है. पंजाब अपने क्षेत्र में एसवाईएल नहर का निर्माण न करके हरियाणा के हिस्से का लगभग 1.9 एमएएफ पानी गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल कर रहा है.

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सीएम मनोहर लाल ने बताया कि पंजाब और राजस्थान हर साल हरियाणा के लगभग 2600 क्यूसेक पानी का इस्तेमाल कर रहा है. यदि यह पानी हमें मिलता तो हरियाणा की 10.08 लाख एकड़ जमीन की प्यास बुझती और लाखों किसानों को इसका लाभ पहुंचता. हरियाणा खासकर दक्षिणी हरियाणा के लोगों के लिए एसवाईएल नहर का निर्माण होना बेहद जरूरी है और इसके लिए हरियाणा हरसंभव प्रयास करेगा.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.